छेहरटा में 1965 के युद्ध में शहीद हुए 52 शहीदों की याद में बाबा बुड्डा के वंशज ने जलाए दीप

अमृतसर।स्टेट समाचार।अखिल मेहरा 
1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान 22 सितंबर को छेहरटा में पाकिस्तान के जंगी जहाजों द्वारा गिराए गए बमों से 52 लोग मारे गए थे और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। गुरु की नगरी छेहरटा में हुई इस दुखद घटना को 57 साल हो चुके हैं। इन 52 शहीदों (पुरुषों, महिलाओं और बच्चों) की याद में पहली बार बाबा बुड्डा वंशज प्रो. बाबा निर्मल सिंह रंधावा पुत्र संत अमरीक सिंह रंधावा  (मुख्य संप्रदाय बाबा बुड्डा वंशज गुरु के हली रंधावा, गुरु की वडाली-छेहरटा) और ज्ञानी गुरदीप सिंह कंबोज (प्रधान 'नामदेव नामलेवा-टांक कक्षत्री भाईचारा वेलफेयर एसोसिएशन-रजि. अमृतसर) द्वारा शहीदों की याद में बने स्मारक जंझ घर के बाहर रात समय छेहरटा बाजार के गणमान्य व्यक्तियों सहित 57 दीपों की "57" आकृति बनाकर दीप प्रज्ज्वलित किए गए। दीप प्रज्ज्वलित करने से पहले यादगारी अस्थान पर 52 शहीदों के नाम वाली पट्टिका को प्रो. बाबा रंधावा, गुरदीप सिंह आदि ने कच्ची लस्सी से स्नान करवाया। प्रो. बाबा रंधावा की अरदास के उपरांत 57 दीपों की आकृति के पहले पांच दीप को गुरदीप सिंह, प्रो. बाबा निर्मल सिंह रंधावा, नामधारी जीत सिंह, कंवलजीत सिंह और भाई दर्शन सिंह ने सतनाम वाहेगुरु का जाप करते हुए प्रज्ज्वलित किया, शेष दीप छेहरटा बाजार के गणमान्य व्यक्तियों द्वारा प्रज्ज्वलित किए गए। 57 साल पहले 1965 में छेहरटा (भल्ला गली) में हुए बम विस्फोट में शहीद हुए लोगों के परिवार के लोग दीप जलाने वालों में शामिल थे। दीप प्रज्ज्वलित कर ज्ञानी गुरदीप सिंह को प्रो. बाबा रंधावा ने सम्मानित भी किया। यहां गौरतलब है कि ज्ञानी गुरदीप सिंह 1965 में छेहरटा में हुई बमबारी के चश्मदीद गवाह होने के साथ-साथ भारतीय सैनिकों को चाय-पानी परोसने में लगे हुए थे।

 

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