धार्मिक आस्था एवं भारत-पाक की साझी विरासत का प्रतीक बाबा चमलियाल, मजार की मिट्टी और कुएं के जल के लेप से मिलती है चर्म रोग से मुक्ति

विजयपुर।

जम्मू से 50 किलोमीटर दूर भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ लगते रामगढ़ सेक्टर के एस.एम.पुर क्षेत्र में भारत-पाक जीरो लाइन पर स्थित हिंदू-मुस्लिम एकता, भाईचारे की प्रतीक व आस्था का केंद्र विश्व प्रसिद्ध धार्मिक, चमत्कारी बाबा चमलियाल की दरगाह हिंदू-मुस्लिम आस्था की ऐसी पावन श्रद्धास्थान है, जिसकी शोहरत व श्रद्धा में विभाजन की आधी सदी भी कमी न ला सकी। दोनों देशों के हिंदू व मुसलमान व अन्य समुदाय के लोग बाबा चमलियाल की दरगाह के प्रति अपार श्रद्धा रखते हैं। बात इतिहास के संदर्भ में करें तो बताया जाता है कि लगभग सवा दो सौ साल पहले सरहदी गांव चमलियाल में बाबा दलीप सिंह मन्हास नामक एक नेक बंदा रहता था। बाबा जी धार्मिक प्रवृत्ति वाले रहम दिल फकीर थे और ईश्वर में उनकी गहरी आस्था थी व भगवान की भक्ति में लीन रहता और दीन दुखियों की सेवा करने में वह ज्यादा वक्त गुजारते थे। धर्म के नाम पर नफरत की रोटियां सेकने वाले दुष्टों व शरारती लोगों को यह सब रास नहीं आया और उन्होंने बाबा जी का वध कर दिया। सिर काटकर गांव सैंदावाली (जो अब पाकिस्तान में है) में फेंक दिया व धड़ चमलियाल गांव में रहने दिया। बाद में इसी जगह पर बाबा दिलीप सिंह जी की मजार बनी जो आज बाबा चमलियाल के नाम से विश्व प्रसिद्ध है। प्रचलित दंतकथा के अनुसार बाबा जी की मृत्यु के बाद उनके एक शिष्य को चरम रोग हो गया। वह चर्म रोग से बहुत परेशान था। यह रोग जब किसी भी उपचार से ठीक नहीं हुआ तो उसने बाबा जी की मजार पर मन्नत की। कहते हैं देव इच्छा से रात को बाबा जी उसके सपन में आए और कहा कि मजार के पास से मिट्टी और नजदीक के कुएं से पानी लाकर शरीर पर लेप करो तो चर्म रोग से मुक्ति मिल जाएगी। उस शिष्य ने ऐसा ही किया और चर्म रोग से छुटकारा पा लिया और वह ठीक हो गया। बस फिर क्या था बाबा जी के चमत्कार की शोहरत फैलने लगी। ऐसी मान्यता है कि चर्म रोग, चंबल रोग की पीडि़तों की विश्व भर में अगर इलाज कहीं होता है तो इसी पवित्र मजार की मिट्टी और पानी के इस्तेमाल से होता है। हर वर्ष जून महीने के आखिरी वीरवार को दरगाह पर लगने वाले मेले में पाकिस्तान की तरफ से उनके रेंजरों द्वारा बाबा जी की श्रद्धास्थली पर चढ़ाने के लिए बी.एस.एफ. को जीरो लाइन पर एक समारोह में चादर सौंपी जाती है जो बाद में बी.एस.एफ. द्वारा मजार पर चढ़ाई जाती है। भारत की ओर से इस स्थल पर पावन चमत्कारिक शक्कर और शरबत पाक रेंजरों को भेंट की जाती है जो बाबा जी के असंख्य पाकिस्तानी श्रद्धालुओं तक पहुंचती है।

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