पुलिस के बड़े अफसरों की तरफ से आमतौर पर थानों को हिदायत दी जाती है। जिसमें कहा जाता है कि जब कोई थाने में शिकायत लेकर आए तो उस पर तुंरत कार्रवाई की जाए।

अपराधियों को खुद शह देती है पुलिस
रिशव नौकरी के नाम पर भी कईयों को लगा चुका है चूना
रिशव के खिलाफ बख्शी नगर थानेदार को दी थी शिकायत
लेकिन पुलिस ने दो माह में कोई कार्रवाई नहीं की थी
जम्मू
पुलिस के बड़े अफसरों की तरफ से आमतौर पर थानों को हिदायत दी जाती है। जिसमें कहा जाता है कि जब कोई थाने में शिकायत लेकर आए तो उस पर तुंरत कार्रवाई की जाए। जिससे की जनता को इंसाफ मिल सके। लेकिन थाना स्तर पर इस पर अमल नहीं किया जाता है। जिस कारण एक गरीब के पैसे मर गए। उसने अपनी मां की चूडियों को बेच दिया था। लेकिन पुलिस की तरफ से उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा उसे कहा गया कि उसके केस में कुछ नहीं हो सकता है। लेकिन जब पुलिस पर खुद आई तो उसी आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए कई टीमों को लगा दिया गया। ऐसा सरवाल हथियार बरामदगी मामले में हुआ है। आरोपी रिशव भट्ट जिसे अब पीएसए लगवाकर जेल में भेजा गया है। वह सरकारी नौकरी के नाम पर लोगों को चूना लगाने के मामले में भी शामिल है। लेकिन उस मामले में बख्शी नगर पुलिस की तरफ से सही तरह से कार्रवाई नहीं की गई थी। पुलिस ने खुद उसे मौका दिया कि वह पुलिस से भाग सके। हालांकि हथियार बरामद होने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। लेकिन तब बात बड़े अफसरों तक पहुंच गई थी। इससे पहले भी रिशव के खिलाफ पुलिस को लिखित में शिकायत आई थी। लेकिन तब पुलिस की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।
जानकारी के अनुसार सरवाल हथियार बरामदगी मामले में पुलिस ने जिस मुख्य आरोपी रिशव भट्ट को गिरफ्तार किया था। उसका नाम इस मामले में पुलिस के सामने नहीं आया था। बल्कि 11 मई को भी पुलिस के पास आया था। जब एक मकैनिक पुलिस के पास लिखित में शिकायत लेकर आया था। उसने बताया था कि रिशव ने उससे सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर एक लाख 30 हजार रूपये लिए है। लेकिन उसे नौकरी नहीं दिलाई गई। उसने थानेदार को बताया था कि उसने अपनी मां की चूडियों को बेचकर पैसे जमा किए थे। वह एक गरीब मकैनिक है। उसने यह भी बताया था कि जब वह पैसे वापस मांगता है तो उसे जान से मारने की धमकिया दी जाती है। उसने रिशव का फोन नंबर भी लिखित शिकायत में दिया था। लेकिन पुलिस की तरफ से उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। उसके घर पर पता तक नहीं किया गया था। इस मामले को हल्के में लिया गया। शिकायतकर्ता की तरफ से कई बार थाने के चक्कर लगाकर थानेदार से मुलाकात की गई थी। लेकिन फिर शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। अगर उस समय उसकी शिकायत पर कार्रवाई की जाती तो हथियारों के अलावा कई और मामले खुल जाते थे। जब पुलिस ने खुद हथियार बरामद किए तो उसे तलाश करने के लिए हर कोशिश की गई। जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार भी कर लिया। लेकिन इस गरीब के बीच में पैसे मर गए। जिसे उसने लोगों की गाडिय़ों को ठीक करके जमा किया हुआ था।

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