अनुच्छेद-370 की समाप्ति के बाद तेजी से बदले कश्मीर के हालात, जानें 3 साल में क्या-क्या हुआ

आज जैसे ही जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को निरस्त करने का तीसरा साल पूरा हुआ कि स्थानीय पुलिस ने शुक्रवार को एक डेटा जारी किया। इसमें कहा गया है कि घाटी में धारा-370 के निरस्त होने के बाद हिंसा और नागरिकों की हत्याओं में लगातार कमी आई है। आपको बता दें कि तीन साल पहले यानी 5 अगस्त 2019 को संसद द्वारा अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया गया था। राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू और कश्मीर और लद्दाख) में विभाजित कर दिया गया था। इससे पहले और इसके बाद सभी मुख्यधारा के नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था। कश्मीर घाटी में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से पहले और बाद के सुरक्षा परिदृश्य की तुलना करें तो पुलिस के आंकड़े स्थिति में बड़े पैमाने पर सुधार दिखाते हैं। पुलिस का कहना है कि 5 अगस्त 2016 से 4 अगस्त 2019 तक कश्मीर में कानून-व्यवस्था बिगड़ने की 3,686 घटनाएं हुईं, जिनमें छह पुलिस या सुरक्षाकर्मियों की भी जान चली गई। वहीं, अगले तीन सालों यानी अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद ऐसी महज 438 घटनाएं घटी हैं। कानून-व्यवस्था की स्थिति संभालते हुए एक भी सुरक्षा बल की जान नहीं गई है। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2016 से 2019 तक कश्मीर में लगभग 930 आतंकी घटनाएं हुईं जो अगले तीन वर्षों में घटकर 617 हो गईं। इसी अवधि में आतंकवादी हमलों में शहीद हुए सुरक्षा बल के जवानों की संख्या 290 थी जो घटकर 174 रह गई।

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