विश्व के प्रथम मात पिता मन्दिर का निर्माण

कार्य जोरों पर, 2025 में हो जाएगा तैयार
मात्र आठ महीने में लगभग 20 हज़ार स्क्विायर फ़ीट की बेसमेंट का पहला लेंटर डलकर हो चुका है तैयार
संतांशु शर्मा चंडीगढ़ : मोहाली जिले के बनूड़-अंबाला मार्ग पर गांव खल्लौर में मात-पिता मंदिर का निर्माण कार्य जोर शोर से चल रहा है। साल 2025 में विश्व के इस  प्रथम और एकमात्र मात-पिता मंदिर का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। शुक्रवार को यहां प्रेस कांफ्रेंस के दौरान बोलते हुए मंदिर का निर्माण करने वाले एनजीओ, मात पिता गौधाम ट्रस्ट (एमपीजीडी) के संस्थापक ज्ञान चंद वालिया ने कहा कि समस्त मात - पिता गौधाम परिवार की यथा मेहनत व सभी के सहयोग से मात्र 8 महीने में लगभग 20 हज़ार स्क्विर फ़िट की बेसमेंट का पहला लेंटर डलकर तैयार हो चूका है आगे काम बहुत तेजी से चल रहा है। उन्होंने आगे बताया कि इसी सन्दर्भ में भजन सम्राट कंचन कुमार (आस्था चैनल ) व संगीता आर्य का प्रोग्राम 'सांभ लो मापे , रब्ब मिलजु आपेÓ जिसका उद्देश्य अपने माता - पिता को संभालो , प्रभु अपने आप मिल जायेंगे 7 अगस्त दिन रविवार को शाम 5 बजे से 8 तक ( तत्पश्चात भण्डारा ) अग्रवाल भवन सेक्टर - 16 , पंचकूला में रखा गया है जिसके मुख्य अतिथि - जाने माने समाजसेवी जगमोहन गर्ग जी होंगे। ज्ञान चंद वालिया ने कहा कि यह मन्दिर माता-पिता को समर्पित होगा। उन्होंने कहा कि मंदिर में कोई प्रतिमा न हो कर श्रद्धालु माता पिता में ही भगवान होने का एहसास करेंगे। मात पिता गौधाम ट्रस्ट को ज्ञान चंद वालिया जिन्हें गौचर दास ज्ञान के नाम से जाना जाता है, द्वारा 2011 में  स्थापित किया गया था। गौधाम परिसर जहां मंदिर का निर्माण किया जा रहा है, 10 एकड़ भूमि पर फैला हुआ है। ज्ञान चंद वालिया ने कहा कि मात पिता मंदिर का उद्देश्य घर-घर में माता-पिता का सम्मान के बारे में जागरूकता फैलाना के अलावा गाय माता के आध्यात्मिक लाभों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। उन्होंने आगे बताया कि हम सबके लिए माता-पिता ही हमारे भगवान होते हैं , इनसे से बड़ा कोई नहीं है। जो आशीष ये दिल दे दें वह अवश्य ही पूर्ण होता है । वे वही हैं जो अपने बच्चों के लिए अपना जीवन समर्पित करते हैं। वे अपने बच्चों के लिए अपने आराम और खुशी को त्याग देते हैं ताकि वे अपने जीवन में सफल हो सके, उन्होंने कहा। सभी समुदाय व धर्मों के लिए 'मात पिता मन्दिरÓ पूरी तरह से माता-पिता के लिए समर्पित होगा जहां उनकी पूजा और सम्मान किया जाएगा।

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